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Tejas देखिये और गर्व कीजिये अपने हिंदुस्तानी होने पर, इस नए हिंदुस्तान की सेना पर

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गौरव
गौरव

Cinema Critic & FilmMaker

कलाकार: कंगना रनौत, अंशुल चौहान, वरुण मित्रा, आशीष विद्यार्थी
लेखक/निर्देशक: सर्वेश मेवाड़ा

स्टार: ***1/2 + 1/2 (कंगना के लिए)

कंगना रनौत आज के दौर की वो अभिनेत्री हैं जिनकी उपस्थिति मात्रा से किसी फिल्म के लिए लोगों की अपेक्षा आसमान पर होती है. और फिर जिस फिल्म में कंगना हो वहां बाकी लोग बस जरुरत भर होते हैं. तेजस कंगना की वही बहुप्रतीक्षित फिल्म है, जिसके बारे में लोग किस रियल स्टोरी से प्रेरित होने की कयास लगा रहे थे. लेकिन Tejas भारत और गौरवान्वित करने वाली भारतीय सेना की नयी तस्वीर प्रस्तुत करती एक फिक्शन फिल्म है, जो थिएटर में कई बार आपकी नसों में देशभक्ति का उबाल भरती है, आपकी आँखें नम करती है और आपको मौका देती है कि आप गर्व कर सकें खुद के हिंदुस्तानी होने और हिंदुस्तानी सेना की छत्रछाया में जीने पर.

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क्या है कहानी

कहानी देशभक्ति और आतंकवाद वाले बाकी कहानियों से कुछ खास जुदा नहीं है, बस अंतर इतना है कि यहां केंद्र में लड़के नहीं बल्कि दो लड़कियां हैं, इस सोच के साथ कि जल्द ही हिन्दुस्तान में वो दिन भी आएगा जब लोग किसी भी काम के लिए केवल लड़को को आगे करने के बजाय ये कहेंगे कि हमारी लड़कियां ये बेहतर कर सकती है. तेजस (कंगना रनौत) बचपन से फाइटर जेट उड़ाने का सपना देखती है, और अपने इस सपने को पूरा भी करती है. मिशन के दौरान कई बार ऑर्डर्स के खिलाफ जाकर देश की रक्षा के लिए जान जोखिम में भी डालती है. उसके मिशन में उसके साथ आफिया (अंशुल चौहान) जैसी फाइटर भी है. आतंकवादियों के एक ऑपरेशन में कैसे तेजस और आफिया मिलकर दुश्मनों का खत्म करते हैं और कैसे तेजस इस मिशन में दुश्मन का जड़ से सफाया करने के लिए खुद की जान भी दे देती है, फिल्म इसी जज्बे की कहानी कहती है. कलाकारों के उम्दा अभिनय के बावजूद फिल्म कमजोर कहानी और कमजोर vfx की वजह से कई बार आपके भीतर उबाऊपन का एहसास देती है, लेकिन हर बार देशभक्ति और रामराज्य का तड़का आपको वापस सीट पर बिठा देता है.

tejas

कैसा है अभिनय

लगभग दो घंटे की फिल्म ख़त्म हो जाती है पर यकीन कीजिये इस दो घंटे में आप कतई इस बात की जरुरत महसूस नहीं करेंगे कि काश इस कहानी में कोई मेल लीड किरदार होता. कंगना इस भरोसे पर हर बार की तरह खरी हैं, पर औसत कहानी और बाकी की खानापूर्ति उनकी इस कोशिश को मुकम्मल अंजाम तक नहीं पंहुचा पाती. देशभक्ति की भावना भी तब एक मुकम्मल अंजाम पाती है जब वो एक उम्दा कहानी और तकनीक के चाशनी में लिपटी हो. और फिल्म यही मात खा जाती है. बावजूद इसके कंगना, अंशुल और बाकी कलाकारों के अभिनय में आप कोई खामी नहीं ढूंढ सकते. कंगना अब उस भरोसे का नाम हो चली हैं जिसे किसी सहारे की जरुरत ही महसूस नहीं होती.

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क्यों देखें फिल्म

सबसे पहले तो आप ये फिल्म कंगना के लिए देखिए, बिना किसी अन्य फिल्म के किरदारों से उसकी तुलना किये हुए. फिर अगर आप देशभक्ति, भारतीय सेना, आतंकवाद, पाकिस्तानी दुश्मन जैसे मुद्दों और जय श्री राम जैसे उद्घोष को अनुभव करना चाहते हैं या इससे रोमांचित होते हैं तो एक बार थिएटर का मुजायरा जरूर करें.